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Showing posts from March, 2022

love-2

कुछ इधर की कुछ उधर की कह के वो राज छुपा गयी नजरें झुका के।।

dansh. (bite)

दंश ...... "सुनिए....!" "हां....बोलिए ...!" "आप, वो बच्ची, दिखाने वाले थे, ना......!" आज ....! "जी......!" "परंतु, आप.... कहां से ....??" मेरा आज अपॉइंटमेंट था। आपके अनाथ आश्रम से मुझे एक बच्ची दिखाने के लिए बुलाया गया था। मैं कोलकता से आई हूँ। अच्छा.....! अच्छा.....! "आप......" आराध्या जी....! "बिल्कुल...."! थोड़ी देर बाद वह वापस आती है। अनाथ आश्रम की मैनेजर शायद थी, वो। मैनें अन्दाजा लगाने की कोशिश की। "जी, हां ...... ! आप आइए बच्ची देख लीजिए। मैंने अनाथ आश्रम के बड़े से हॉल में कदम रखा। वहां 10, 15 की तादात में लड़कियां, सुंदर-सुंदर, प्यारी-प्यारी, नए-नए ड्रेस पहन कर खड़ी थी। उन्हीं में से एक बहुत ही छोटी-सी लड़की थी, जो शायद 6 साल की रही होगी, मैं, उसके पास जाकर खड़ी हो गई ! वह रो रही थी, पता नहीं क्यों...! मुझे उस पर बहुत प्यार आया। और मैंने प्यार से उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा..... "गुड़िया..... चलोगी, मेरे साथ ....!" पता नहीं क्यों, वो मेरी साड़ी से लिपट कर खड़ी हो गई, ...

एहसास प्यारे से। (lovely feelings)

गुजार ही देंगे ये दिन भी, कुछ सुस्त कुछ उदास से, बलिष्ठ घेरे की कसक, मन में फिर एहसास जगाती है, तुम्हारे इंतजार में, अश्क़ों से तर-बतर एक उम्मीद, तेरे आने की, हर शाम कुछ पिघला-सी देती है, और दबे पांव गुजर जाती है, मुझें जलता छोड़कर। अरसा बीत गया, तुम्हें देखे बिना, न आवाज सुनी, ना ही सुनी कोई आहट, कदमों की तेरे, सुनो, कभी आओगे न...तुम गुजर रहे हैं ये दिन ...बस तुम्हारे इंतजार में, मेरे। कब तलक आओगे, एक बार तो, आना, जलते इस मन की, प्यास बुझा जाना, एक अंश खुद का, मेरी कोख में जमा देना, आना, समझे, आना जरूर, कहीं ऐसा न हो जिस रोज़ तुम सोचोगे कि, कितने दिन हुए, चलो, आज बात करते हैं, और तब तक, सब खत्म हो जाये, बातें, रातें, यादें सब, सब-कुछ, खत्म ही हो जाए। .......in English...... Will pass this day too, From some dull to some sad, tight circle, Awakens the feeling in the mind again, waiting for you, soaked with tears One hope, of your coming, Every evening something melts, And passes slowly, leaving me burning Years passed, without seeing you, did not hear...

अधूरी प्यास। (unfulfilled thirst)

कि...... एक अधूरी प्यास-सी है, इस दिल में, कुछ तो था तेरे-मेरे बीच में, जो आज भी नासूर मेरा, बन दर्द देता है, तुझको, बार-बार क्यों याद आता है, वो मन्ज़र मुझको। अकेली ही तो चल रही थी, कुछ भी नहीं था मेरा जीना, अपने सपनों को लेकर, अठखेलियाँ मैं करती थी, ना तमन्ना थी, ना आरजू थी कोई, फिर, तूने ही मिला दिया, मेरे अपने सपनों में एक और नया सपना, अपना। बढते गये मेरे कदम, एक अंजान दिशा की ओर, ना उसको पता, ना ही खुद की खबर, ना था कोई छोर, चल दिए बस दोनों ही, इस सफर पर,अनजान डगर पर, हाथों में हाथ थामे, बन-एक दूसरे का रहबर। समय गुज़र गया, सब-कुछ यूं बिछड गया, सपनो का मेरे वो, ख्वाबी महल जो था, ढल गया, बिखर गये वादे मेरे,उजड़ चुका बाग सारा, मुरझाए से फूल सारे, बन गया रेगिस्ता-सा दिल हमारा। रोया तड़पा वो, मैं भी बिलख पड़ी, नैनों में नीर भर के, कितनी रातें ना सोई मैं, तू भी तो जागा होगा....,मुझको याद करके, ठहर-सी गयी ये मेरी जिन्दगी भी, अब उसकी फरियाद करके। जा....जा तू अब, मैं ही ना थी तेरे कबिल, क्या तुझको बतलाऊं मैं। डाली का इक टूटा फूल थी, कैसे तुझको समझाऊ मैं...?? प्यार ...