गुजार ही देंगे ये दिन भी, कुछ सुस्त कुछ उदास से, बलिष्ठ घेरे की कसक, मन में फिर एहसास जगाती है, तुम्हारे इंतजार में, अश्क़ों से तर-बतर एक उम्मीद, तेरे आने की, हर शाम कुछ पिघला-सी देती है, और दबे पांव गुजर जाती है, मुझें जलता छोड़कर। अरसा बीत गया, तुम्हें देखे बिना, न आवाज सुनी, ना ही सुनी कोई आहट, कदमों की तेरे, सुनो, कभी आओगे न...तुम गुजर रहे हैं ये दिन ...बस तुम्हारे इंतजार में, मेरे। कब तलक आओगे, एक बार तो, आना, जलते इस मन की, प्यास बुझा जाना, एक अंश खुद का, मेरी कोख में जमा देना, आना, समझे, आना जरूर, कहीं ऐसा न हो जिस रोज़ तुम सोचोगे कि, कितने दिन हुए, चलो, आज बात करते हैं, और तब तक, सब खत्म हो जाये, बातें, रातें, यादें सब, सब-कुछ, खत्म ही हो जाए। .......in English...... Will pass this day too, From some dull to some sad, tight circle, Awakens the feeling in the mind again, waiting for you, soaked with tears One hope, of your coming, Every evening something melts, And passes slowly, leaving me burning Years passed, without seeing you, did not hear...