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 लिपस्टिक,

उसने जो दी तो,

बरसों से कुवारें होठों पर शरम की लालिमा बिखर गई।


लगाई जो लिपस्टिक तो, 

खुद को देख के शर्म से ये निगाहें झुक गई।


उसने जब मुस्कुरा कर मुझे देखा,

उसकी आंखों के आइने में मैं खुद का रूप देख के

उस से ही लिपट गई,


रंग खिल उठा,

बार बार ये आइने(उसकी आखों रूपी आइने) ने कहा,

देख के खुद का लाल चेहरा,

खुद ही में मैं सिमट गई,


लगाई जो लाली होठों पर, खुद से ही मैं लिपट गई।


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