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प्यार मिलना मुश्किल है.

छूट ही जाते है बन्धन, कितना भी कर लो जतन,
छुपाए नहीं छुपती, लगी हो जब, प्रीत की अगन,

दूर है वो बहुत, जिसको पाने को मेरा मन है तरसा,
आज भी जेहन में, चेहरा है उसका, बीत गया अरसा,

ना जाने क्यों, हरेक कहानी में, मैं उसको, जीता हूँ,
उसको, अपनी कहानी के, अन्त में, खुद, से मिलाता हूं,

*अगर मिल जाए तो फिर वो प्यार ही कैसा*.....?
नियती की इस तहरीर पर, अपने को समर्पित करता जाता हूँ। 

@njuBS

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